*नौ साल बाद विनोद राय हत्याकांड पर सियासत गर्म: न्याय की मांग या 2027 का नया चुनावी मुद्दा?*
स्थानीय गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जो मुद्दा नौ सालों तक राजनीतिक रूप से शांत रहा, वह चुनाव नजदीक आते ही अचानक क्यों उछलने लगा? आम लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात की जोरदार चर्चा है कि क्या यह लंबे समय से लंबित न्याय की एक ईमानदार कोशिश है, या फिर फेफना की राजनीति में मतों के समीकरण साधने का नया चुनावी पैंतरा?
चुनावी मौसम में पुराने और संवेदनशील घटनाक्रमों का दोबारा उभरना नया नहीं है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि स्वर्गीय विनोद राय का परिवार इस पर क्या रुख अपनाता है। यदि परिवार खुद आगे आकर सीबीआई या उच्चस्तरीय जांच की मांग करता है, तो यह मामला महज राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर उठकर निष्पक्ष न्याय की लड़ाई बन सकता है। फिलहाल, 2027 से पहले नरही कांड की यह गूंज फेफना की भावी राजनीति की दिशा तय करती दिख रही है।
