*जलवायु परिवर्तन का कहर: हर साल आकाशीय बिजली से जा रही हजारों जानें*
-प्रकृति का तांडव: 30,000°C तापमान वाली आकाशीय बिजली भारत में सबसे घातक प्राकृतिक आपदा बनी
हालिया अध्ययनों से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पिछले कुछ वर्षों में आकाशीय वज्रपात (बिजली गिरने) की घटनाओं में 400 प्रतिशत से भी अधिक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, वैश्विक तापमान में मात्र 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने से वज्रपात की आशंका 10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। आकाशीय बिजली इतनी खतरनाक होती है कि इसमें 10 करोड़ वोल्ट का करंट और सूर्य की सतह से पांच गुना अधिक यानी 30,000 डिग्री सेंटीग्रेड तक का तापमान होता है, जिससे इंसान, जीव-जंतु और फसलें पल भर में भस्म हो जाते हैं।
वैश्विक स्तर पर हर साल वज्रपात से करीब 24,000 लोगों की मौत होती है। भारत में यह सबसे घातक प्राकृतिक आपदा बनकर उभरी है, जहाँ कुल प्राकृतिक आपदाओं के 35.7% मामले अकेले बिजली गिरने के होते हैं। वर्ष 1975 से 2024 के बीच देश में 1,02,263 लोगों ने इसके कारण अपनी जान गंवाई है, जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश सबसे संवेदनशील राज्य हैं। आपदा विशेषज्ञों का कहना है कि खराब मौसम में पेड़ों के नीचे न छिपकर और 'दामिनी ऐप' जैसे आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर, जो 20 किमी के दायरे में 40 मिनट पहले चेतावनी देता है, इस जानलेवा आपदा से बचा जा सकता है।


