*एक दशक से गंगा का तांडव, नौरंगा का अस्तित्व खतरे में: प्रशासन के दावों पर भड़के ग्रामीण*
-20 करोड़ की योजनाएं फेल, सरकारी लापरवाही के खिलाफ भुआल छपरा के युवाओं ने संभाला मोर्चा
-मुशीर जैदी/सुधीर सिंह की ग्राउन्ड रिपोर्ट
बैरिया (बलिया): स्थानीय तहसील क्षेत्र के नौरंगा ग्राम पंचायत में पिछले एक दशक से गंगा नदी का रौद्र रूप कहर बरपा रहा है। कटान के कारण पुरवा का पुरवा नदी में समाता जा रहा है, जिससे सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि और आशियाने जमींदोज हो चुके हैं। बेघर हुए बहुसंख्यक लोग बक्सर-कोइलवर तटबंध पर फूस की झोपड़ी बनाकर शरण लेने को मजबूर हैं।
प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ गुरुवार को पीड़ितों ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई थी, जिसके बाद शुक्रवार को उप जिलाधिकारी (एसडीएम) संजय कुशवाहा ने मौके का मुआयना किया। निरीक्षण के दौरान जब ग्रामीणों ने पूछा कि करोड़ों की लागत से पर्को पॉइंट और एसी बैग लगाए जाने के बावजूद कटान क्यों नहीं रुक रहा, तो एसडीएम ने केवल जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंपने की बात कही। इस 'विवेकशून्य' जवाब पर वहां मौजूद युवाओं का गुस्सा भड़क गया, जिसे ग्राम प्रधान ने किसी तरह शांत कराया।
चौंकाने वाली बात यह है कि बाढ़ विभाग इस वित्तीय वर्ष में करीब 20 करोड़ रुपये की दो योजनाओं के तहत बचाव कार्य कराने का दावा कर रहा है, जबकि धरातल पर विभाग के मात्र दो-तीन कर्मचारी ही दिखे। ठेकेदारों की कार्यशैली से त्रस्त भुआल छपरा के युवाओं ने अब खुद ही बांस-बल्ली और बालू की बोरियों के सहारे बांध बचाने का मोर्चा संभाल लिया है। करीब 25 हजार की आबादी वाले इस गांव को बचाने के लिए यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो नौरंगा का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। मौके पर पूर्व प्रधान राजमंगल ठाकुर, शाहजा ठाकुर सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।