बलिया/पुरुलिया पश्चिम बंगाल। भारत यात्रा केन्द्र कांटाडीह स्थित आचार्य नरेन्द्र देव विद्या निकेतन में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जन्म शताब्दी पर स्मृति सभा का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम पूर्व पीएम चंद्रशेखर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया गया। भारत यात्रा केन्द्र के संयोजक एमए सिद्दीकी ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि चंद्रशेखर जनता की समस्याओं को नजदीक से जानने के लिए छह जनवरी 1983 को कन्याकुमारी स्थित गांधी मंड्पम् से केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट, उत्तर प्रदेश होते हुए 4260 किमी की यात्रा कर 25 जून 1983 को दिल्ली स्थित बापू के समाधि स्थल राज घाट पर पहुंचे। जनता की मूलभूत समस्या जैसे पीने का पानी, शिक्षा, गर्भावती महिलाओं एवं बच्चों को कुपोषण से बचाना, साम्प्रदायिक सौहार्द स्थापित करना, निचले पायदान पर रहने वाले वंचित-शोषित आदिवासियों को सम्मान की जिंदगी यापन करने की सुविधा देना को लेकर जीवन भर संघर्षरत रहे। अध्यक्षीय संबोधन में संतोष कुमार शुक्ल ने कहा कि चंद्रशेखर संसदीय परंपरा के उद्घोषक, समाज में सही बात कहने वाले, चुनाव में हार-जीत को लेकर परेशान न होने वाले राजनेता रहे। इस अवसर पर खगेन्द्र नाथ गोस्वामी, उमा चौधरी, दिलीप महतों आदि मौजूद रहे। इसी क्रम में कांटाडीह नगर स्थित शिशु भारतीय विद्या निकेतन में देवाशीष मुखर्जी की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें लोगों ने चंद्रशेखर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हे याद किया। मुख्य अतिथि संतोष ने कहा कि चंद्रशेखर कार्यकर्ताओं के नेता थे। गांव-गिराव का कार्यकर्ता जब उनसे मिलता था तो उनके द्वारा दिये गये असीम स्नेह-प्यार-दुलार को जीवन पर्यंत संजोये रखा। इस अवसर पर सुभाष महतो, संध्या सिंह पातर, मोनिक सोरेन, मऊनिता महतो, मधुमिता सिंह लाया, अमिशईश आदि मौजूद रहे।