बलिया। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी और उनके सहयोगी कर्मचारियों का मानना है की अधिशासी अधिकारी की ऊंची पहुंच शासन स्तर पर है उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उल्लेखनीय है कि पीछे ले दिनों प्रदेश सरकार के कबीना मंत्री के नेतृत्व में सभासदों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री से भेंट कर अधिशासी अधिकारी के काले कारनामों की जांच कराए जाने के पूर्व यहां से उनका स्थानांतरण यदि नहीं हुआ तो वह जांच को प्रभावित करते रहेंगे। नगर पालिका परिषद के टैक्स लिपिक और महामंत्री स्वायत्त शासन कर्मचारी महासंघ भारत भूषण में प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर समस्त प्रकरण की जांच कराए जाने की मांग की है। मुख्यमंत्री को संबोधित शिकायती पत्र में अधिशासी अधिकारी दिनेश विश्वकर्मा नगर पालिका परिषद द्वारा किए गए वित्तीय अनियमितताओं एवं शासनादेश का उल्लंघन कर भ्रष्टाचार किए जाने के संबंध में अवगत कराया है कि योगी पत्नी शिल्पा शर्मा जो राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं जिन्हें नगरपालिका में कार्यरत बता कर कूट रचित तरीके से शासनादेश का उल्लंघन कर दो लाख 87 हजार ₹7 का भुगतान तथा शासनादेश के विरुद्ध ₹66440 चिकित्सा प्रतिपूर्ति के नाम पर को ठीक ढंग से आश्रित किया गया है इतना ही नहीं 14वें वित्त से प्राप्त धनराज के कार्यों का ई निविदा गलत तरीके से करा कर एक ही फॉर्म को ₹100000000 का टेंडर दिया गया है इसकी शिकायत नगर पालिका परिषद के भोले बाबा कहे जाने वाले चेयरमैन अजय कुमार समाजसेवी ने जिला स्तर के अधिकारियों और शासन के अधिकारियों से की है कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है की नगर पालिका परिषद की अचल संपत्तियों को भू माफियाओं और आरसी बाबू प्रमोद चौरसिया की मिलीभगत से खुलेआम लूट लूट हो रही है। जिसका जीता जागता प्रमाण 2 दिन पूर्व नगर पालिका परिषद के जॉपलिन गंज सुप्रसिद्ध भाकर के वैध के प्रपौत्र द्वारा उनके बागल की सार्वजनिक गली में कथित रूप से अपना गैराज बनवा कर फाटक लगा दिया गया है। जिसके शिकायत पर अधिशासी अधिकारी द्वारा तत्काल फॉर भेजने कार्रवाई किए जाने का आश्वासन तो दिया परंतु हुआ कुछ नहीं। ऐसे ही एक प्रकरण बहादुरपुर आवासीय कॉलोनी के मुख्य द्वार के समीप नगर पालिका परिषद द्वारा बनाए गए 2 भवनों में से एक पर कथित चिकित्सक द्वारा निजी आवास बताकर उक्त भवन के सामने निर्माण कार्य कराए जाने लगा जिसका संज्ञान लेते हुए चेयरमैन ने तत्काल कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए परंतु निर्देश का अब तक कोई असर देखने को नहीं मिला। इसी प्रकार 5 मार्च 1915 में रजिस्ट्री शुदा जमीन के अभिलेखों में भी आर सी लिपिक द्वारा 1964 मैं अभिलेखों में हेरा फेरी किए जाने के चलते आस्थावान लोगों में आक्रोश देखने को मिला। ठाकुर जी कैलाश धाम नाम से गोला रोड शीश महल के समीप स्थिति जमीन पर अवैध निर्माण कराए जाने पर फिलहाल तहसीलदार बलिया ने रोक लगा दी है। ऐसे ही अनगिनत प्रकरण अधिशासी अधिकारी और आरसी लिपिक के साथ-साथ अन्य कर्मचारियों के विरुद्ध प्रकरणों की जांच अधिशासी अधिकारी द्वारा जिला प्रशासन से लेकर शासन स्तर पर प्रभावित की जा रही है। अधिशासी अधिकारी और उनके चहेते कर्मचारियों की नजर में ना तो शासनादेश का कोई महत्व है और ना ही नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष अजय कुमार समाजसेवी कोही कोई महत्व दिया जाता है यह बिना उनकी अनुमति के बिना टेंडर कराए साइकिल स्टैंड पर वसूली कर आते हैं मनमाने ढंग से शासन की अनुमति के बगैर साप्ताहिक ददरी मेले का आयोजन करते हैं जहां लूट खसोट बिना खौफ जारी है। इतना ही नहीं अधिशासी अधिकारी के काले कारनामे कुछ सभासद गण भी उनके सहयोगी बने हुए हैं जिससे उन्हें कोई है नहीं है। संजोग से शासन की कृपा पर उन्हें जिला प्रशासन द्वारा नगर पंचायत चितबड़ागांव का भी कार्यभार सौंप दिया गया है। जहां के चेयरमैन से लगाएत कर्मचारी बार-बार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं तो उन्हें चेयरमैन के खिलाफ भीषण घोटाले जेल भेजने की धमकी दी जा रही है। प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल में नौकरशाह निरंकुश होकर सरकार की विकास योजनाओं की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं फिर भी उनके खिलाफ वांछित कार्रवाई आखिर कब तक लंबित रहेगी देखना यह है कि होता क्या है।